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रमेश कुमार फिर बने आंध्र प्रदेश के निर्वाचन आयुक्त, हाईकोर्ट ने जगन सरकार के अध्यादेश को किया रद्द

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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्त (एसईसी) निम्मगड्डा रमेश कुमार का कार्यकाल पांच साल से घटाकर तीन साल करके उन्हें हटाने का अध्यादेश रद्द कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी और वरिष्ठ न्यायाधीश सत्यनारायण मूर्ति की हाईकोर्ट की पीठ ने सरकारी आदेशों (जीओ नं. 31, 617 और 618) को भी निरस्त कर दिया। इसके साथ ही निर्देश दिया कि रमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से एसईसी के रूप में बहाल किया जाए।

हाईकोर्ट के फैसला सुनाए जाने के एक घंटे के भीतर, रमेश कुमार ने बताया की कि उन्होंने अदालत के आदेश के अनुसार एसईसी के रूप में प्रभार फिर से संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्पक्ष रूप से करेंगे जैसा कि उन्होंने अतीत में किया था।

जगन मोहन रेड्डी सरकार ने 10 अप्रैल को आंध्र प्रदेश पंचायत राज अधिनियम में संशोधन करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल को पांच से घटाकर तीन वर्ष करने का आदेश दिया था। अध्यादेश जारी होने के एक दिन के अंदर, सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस वी कानागराज को राज्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया और उन्होंने तुरंत कार्यभार संभाला।

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हाईकोर्ट की एक बैच की लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। रमेश कुमार ने आंध्र सरकार के अध्यादेश जरिए किए गए अपने निष्कासन को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि राज्य सरकार के पास संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश को पारित करने की कोई शक्तियां नहीं हैं।

बता दें कि 15 मार्च को एक अधिसूचना जारी कर मार्च के आखिरी सप्ताह में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को स्थगित करने का आदेश दिया गया था। इसके पीछे वजह कोरोनो वायरस महामारी बताई गई थी। इसी के बाद आंध्र की जगन मोहन रेड्डी सरकार ने रमेश कुमार को अध्यादेश के जरिए से पद से हटा दिया गया।

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